mahshar men chalte chalte karunga ada namaaz | महशर में चलते चलते करूँँगा अदा नमाज़

  - Ahmad Husain Mail
महशरमेंचलतेचलतेकरूँँगाअदानमाज़
पढ़लूंगापुल-सिरातपे'माइल'क़ज़ानमाज़
सरजाएउम्रभरकीहोयारबअदानमाज़
आएमिरीक़ज़ातोपढ़ूँमैंक़ज़ानमाज़
माँगीनजातहिज्रसेतोमौतगई
रोज़ेगलेपड़ेजोछुड़ानेगयानमाज़
देखोकिफँसजाएँफ़रिश्तेभीजालमें
क्यूँँपढ़रहेहोखोलकेज़ुल्फ़-ए-रसानमाज़
हरइकसुतूनख़ाना-ए-शर-ए-शरीफ़है
रोज़ाहोयाज़कातहोयाहजहोयानमाज़
येक्यूँँख़मीदाहैसिफ़त-ए-साहब-ए-रुकू
क्यापढ़रहीहैदोशपेज़ुल्फ़-ए-दोतानमाज़
निय्यतजोबाँधलीतोचलामैंहुज़ूरमें
रहबरमिरीनमाज़मिरीरहनुमानमाज़
साक़ीक़यामसेयेजोआयारूकूअ'में
शीशाख़ुदाकेख़ौफ़सेपढ़ताहैक्यानमाज़
उठउठकेबैठबैठकेकरताहैक्यूँँग़ुरूर
ज़ाहिदकहींबढ़ाएतेरीरियानमाज़
अरकानयादहैंमुझेदावर-ए-जज़ा
गरहुक्महोतोसामनेपढ़लूँक़ज़ानमाज़
शैतानबनगयाहैफ़रिश्ताग़ुरूरसे
क्याफ़ाएदाहुआजोपढ़ीजा-ब-जानमाज़
लेजातेहैंमुझेसू-ए-दोज़ख़कशाँकशाँ
रोज़ेमिरेइधरहैंउधरहैक़ज़ानमाज़
हक़्क़-उल-यक़ींकानामउरूज-ए-मक़ामहै
पढ़तेहैंऔलियासर-ए-दोश-ए-हवानमाज़
मस्जिदमेंपाँचवक़्तदु'आवोभीवस्लकी
'माइल'बुतोंकेवास्तेपढ़तेहोक्यानमाज़
  - Ahmad Husain Mail
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