khayal-o-khwaab se ghar kab talak sajaayein ham | ख़याल-ओ-ख़्वाब से घर कब तलक सजाएँ हम

  - Ahmad Hamdani
ख़याल-ओ-ख़्वाबसेघरकबतलकसजाएँहम
हैजीमेंअबतोकिजीख़ुदसेभीउठाएँहम
अजीबवहशतेंहिस्सेमेंअपनेआईहैं
कितेरेघरभीपहुँचकरसकूँपाएँहम
अनीस-ए-जाँतोहैंयेख़ुश-क़दाँचिनारमगर
अदाएँतेरीउन्हेंकिसतरहसिखाएँहम
वोघरतोजलभीचुकाजिसमेंतुमहीतुमथेकभी
अबउसकीराखसेदुनियानईबसाएँहम
सुनारहेहैंदुखोंकीकहानियाँकबसे
बसअबतोध्यानकीनद्दीमेंडूबजाएँहम
हरएकसम्तपहाड़ोंकासिलसिलाहैयहाँ
हमाराहालहैक्यायेकिसेसुनाएँहम
  - Ahmad Hamdani
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