aisa hai ki sab KHvaab musalsal nahin hote | ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते

  - Ahmad Faraz
ऐसाहैकिसबख़्वाबमुसलसलनहींहोते
जोआजतोहोतेहैंमगरकलनहींहोते
अंदरकीफ़ज़ाओंकेकरिश्मेंभीअजबहैं
मेंहटूटकेबरसेभीतोबादलनहींहोते
कुछमुश्किलेंऐसीहैंकिआसाँनहींहोतीं
कुछऐसेमुअम्मेंहैंकभीहलनहींहोते
शाइस्तगी-ए-ग़मकेसबबआँखोंकेसहरा
नमनाकतोहोजातेहैंजल-थलनहींहोते
कैसेहीतलातुमहोंमगरक़ुल्ज़ुम-ए-जाँमें
कुछयाद-जज़ीरेहैंकिओझलनहींहोते
उश्शाक़केमानिंदकईअहल-ए-हवसभी
पागलतोनज़रआतेहैंपागलनहींहोते
सबख़्वाहिशेंपूरीहों'फ़राज़'ऐसानहींहै
जैसेकईअश'आरमुकम्मलनहींहोते
  - Ahmad Faraz
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