aankhoñ men us ki doob ke ubhara nahin hooñ main | आँखों में उस की डूब के उभरा नहीं हूँ मैं

  - Ahmad Fakhir
आँखोंमेंउसकीडूबकेउभरानहींहूँमैं
जिसनेभुलादियाउसेभूलानहींहूँमैं
अबलम्हालम्हाअपनेबिखरनेकाख़ौफ़है
ग़ुंचेकीतरहबंदहूँखुलतानहींहूँमैं
पीछेपलटकेदेखातोपरछाईंभीथी
सोचाथाराह-ए-शौक़मेंतन्हानहींहूँमैं
येसोचताहूँकैसेरहूँगातुम्हारेसाथ
अक्सरतोअपनेसाथभीरहतानहींहूँमैं
'फ़ाख़िर'इसीगलीमेंमिलेगादिल-ए-ख़राब
लेकिनअबइसगलीसेगुज़रतानहींहूँमैं
  - Ahmad Fakhir
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