ai shaauq-e-dil bhi ek muamma ajeeb hai | ऐ शौक़-ए-दिल भी एक मुअम्मा अजीब है

  - Ahmad Fakhir
शौक़-ए-दिलभीएकमुअम्माअजीबहै
सहराकोआँधियोंकीतमन्नाअजीबहै
मौजोंकेइज़्तिराबनेधड़कादियाथादिल
उतरेजोहमउतरगयादरियाअजीबहै
दुश्वारहोगईहैअबअपनीशनाख़्तभी
आईनाकहरहाहैकिचेहराअजीबहै
शाख़ेंजोमेरेसहनमेंहैंउनमेंफलआए
हमसाएकादरख़्तभीकितनाअजीबहै
उठतीहैइकफ़सीलतोगिरतीहैइकफ़सील
'फ़ाख़िर'येचाहतोंकाघरौंदाअजीबहै
  - Ahmad Fakhir
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