aaj yuñ hasti-e-imkaan-o-gumaan se nikle | आज यूँँ हस्ती-ए-इमकान-ओ-गुमाँ से निकले

  - Ahmad Fakhir
आजयूँँहस्ती-ए-इमकान-ओ-गुमाँसेनिकले
डूबकरजैसेमकाँसैल-ए-रवाँसेनिकले
रतजगेबोलनेलगतेहैंमिरीआँखोंमें
रू-ब-रूहर्फ़जबकोईज़बाँसेनिकले
शाख़-ए-हस्तीसेउड़जाएकहींताइर-ए-जाँ
जबतलकतीरकिसीशोख़कमाँसेनिकले
सबगुलाबअपनेहीलगतेहैंचमनमेंलेकिन
कोईतोअपनासफ़-ए-लाला-रुख़ाँसेनिकले
ख़ाना-ए-दिलमेंउतारातोहैसूरज'फ़ाख़िर'
कौनरोकेगाअगरधूपमकाँसेनिकले
  - Ahmad Fakhir
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