ye tarz-e-takallum hai tira ham-nafasaan se | ये तर्ज़-ए-तकल्लुम है तिरा हम-नफ़साँ से

  - Ahmad Aqeel
येतर्ज़-ए-तकल्लुमहैतिराहम-नफ़साँसे
तूदेखरहाहैनज़र-ए-सूद-ओ-ज़ियाँसे
तहक़ीरमिरीइससेसिवाबज़्ममेंक्याहो
मैंतुझसेमुख़ातिबतूफुलाँ-इब्न-ए-फुलाँसे
क्यामा'रका-ए-तूरबपाहोनेलगाहै
इकशो'लालपकताहैमिरेक़ल्ब-ए-तपाँसे
मय-ख़ाना-ए-अजमेरसेवोरंगहैमफ़क़ूद
अबशिकवामुझेकुछभीनहींपीर-ए-मुग़ाँसे
फ़रहादकीमसनदपेअगरबैठनाचाहे
फिरसोचकीबुनियादउठाकोह-ए-गिराँसे
हँसतेहुएकरनाहैरफ़ूज़ख़्म-ए-जिगरका
कुछकामनहींबनतायहाँआह-ओ-फ़ुग़ाँसे
शाइ'रहूँमरूँगातोकिसीढबसेमरूँगा
दोस्तकोईरेलगुज़रतीहैयहाँसे
  - Ahmad Aqeel
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