agar kuchh e'tibaar-e-jism-o-jaan ho | अगर कुछ ए'तिबार-ए-जिस्म-ओ-जाँ हो

  - Aghaz Barni
अगरकुछए'तिबार-ए-जिस्म-ओ-जाँहो
अभीकुछऔरमेराइम्तिहाँहो
मुझेदरपेशहैबसएकमंज़िल
कितुझसेबातहोलेकिनकहाँहो
जिसेमौज-ए-बलाचू
मेंमुसलसल
मिरीकश्तीकाऐसाबादबाँहो
कहाँतकसूरत-ए-इम्काँनिकालूँ
अगरहरबारमेहनतराएगाँहो
मिरेख़्वाबोंकीवोबे-नामजन्नत
ज़मीन-ओ-आसमाँकेदरमियाँहो
मिरेएहसासकेआतिश-फ़िशाँका
अगरहोतोमिरेदिलतकधुआँहो
अगर'आग़ाज़'हैचुप-चापसाहिल
समुंदरकीतरहतुमबे-कराँहो
  - Aghaz Barni
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