be-hisi insaan ka haasil na ho | बे-हिसी इंसान का हासिल न हो

  - Aghaz Barni
बे-हिसीइंसानकाहासिलहो
दोस्तीहोरेतकासाहिलहो
मैंतोबसयेचाहताहूँवस्लभी
दोदिलोंकेदरमियाँहाएलहो
मुझकोतन्हाछोड़नेवालेबता
क्याकरूँँजबदिलतिरीमहफ़िलहो
किसतरहमेरीज़बाँतकआएगा
हर्फ़जोसच्चाईकाहामिलहो
येज़मानाचाहताहैआजभी
ख़ून-ए-दिलतहरीरमेंशामिलहो
जिसतरफ़लेजारहीहैज़िंदगी
उसतरफ़भीकूचा-ए-क़ातिलहो
आदमिय्यतकेलिएयेशर्तहै
आदमीकुछहोमगरसाइलहो
  - Aghaz Barni
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