ye kaise baal khole aa.e kyun soorat banii gham ki | ये कैसे बाल खोले आए क्यूँँ सूरत बनी ग़म की

  - Agha Shayar Qazalbash
येकैसेबालखोलेआएक्यूँँसूरतबनीग़मकी
तुम्हारेदुश्मनोंकोक्यापड़ीथीमेरेमातमकी
शिकायतकिससेकीजेहाएक्याउल्टाज़मानाहै
बढ़ायाप्यारजबहमनेमोहब्बतयारनेकमकी
जिगरमेंदर्दहैदिलमुज़्तरिबहैजानबेकलहै
मुझेइसबे-ख़ुदीमेंभीख़बरहैअपनेआलमकी
नहींमिलतेमिलिएख़ैरकोईमरजाएगा
ख़ुदाकाशुक्रहैपहलेमोहब्बतआपनेकमकी
अदूजिसतरहतुमकोदेखताहैहमसमझतेहैं
छुपाओलाखतुमछुपतीनहींहैआँखमहरमकी
मज़ाइसमेंहीमिलताहैनमकछिड़कोनमकछिड़को
क़समलेलोनहींआदतमिरेज़ख़्मोंकोमरहमकी
कहाँजानाहैथम-थमकरचलोऐसीभीकियाजल्दी
तुमहीतुमहोख़ुदारक्खेनज़रपड़तीहैआलमकी
कोईऐसाहोआईनाकिजिसमेंतूनज़रआए
ज़मानेभरकाझूटाक्याहक़ीक़तसाग़र-ए-जमकी
घटाएँदेखकरबे-ताबहैबेचैनहै'शाइर'
तिरेक़ुर्बानमुतरिबसुनादेकोईमौसमकी
  - Agha Shayar Qazalbash
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