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Afzal Sultanpuri
ishq de rang rangya maula
ishq de rang rangya maula | इश्क़ दे रंग रंगया मौला
- Afzal Sultanpuri
इश्क़
दे
रंग
रंगया
मौला
मैं
दु'आ
नाल
मंगया
मौला
- Afzal Sultanpuri
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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मोहब्बत
अपनी
क़िस्मत
में
नहीं
है
इबादत
से
गुज़ारा
कर
रहे
है
Fahmi Badayuni
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बाप
ज़ीना
है
जो
ले
जाता
है
ऊँचाई
तक
माँ
दु'आ
है
जो
सदा
साया-फ़गन
रहती
है
Sarfraz Nawaz
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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हमेशा
इक
दूसरे
के
हक़
में
दु'आ
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
मिलें
या
बिछड़ें
मगर
तुम्हीं
से
वफ़ा
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
Shabeena Adeeb
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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कमी
कमी
सी
थी
कुछ
रंग-ओ-बू-ए-गुलशन
में
लब-ए-बहार
से
निकली
हुई
दु'आ
तुम
हो
Ali Sardar Jafri
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तिरे
लबों
में
मिरे
यार
ज़ाइक़ा
नहीं
है
हज़ार
बोसे
हैं
उन
पर
प
इक
दु'आ
नहीं
है
Pallav Mishra
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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दुनिया
कुछ
देरी
से
सजदा
करती
है
जोगी
पहले
दिन
से
जोगी
होता
हैं
Vishal Bagh
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अपने
ख़्वाबों
पे
शे'र
लिख
देना
या
सराबों
पे
शे'र
लिख
देना
यार
पर्दा
अज़ीज
है
उनको
बा-हिजाबों
पे
शे'र
लिख
देना
कौन
है
दोस्त
कौन
है
दुश्मन
बे-नक़ाबों
पे
शे'र
लिख
देना
वो
कली
हैं
गुलाब
की
अफ़ज़ल
उन
गुलाबों
पे
शे'र
लिख
देना
ख़ाक
में
मिल
गई
मिरी
ख़्वाहिश
सारे
बाबों
पे
शे'र
लिख
देना
कब
तलक
और
चुप
रहूँगा
मैं
इंक़िलाबों
पे
शे'र
लिख
देना
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Afzal Sultanpuri
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ख़्वाब
मरते
नहीं
बिखर
जाते
तुम
न
मिलते
तो
यार
मर
जाते
यार
मुझको
अजीब
लगता
था
बिन
तुम्हारे
भला
किधर
जाते
आँख
में
क्या
बचा
बताओ
तुम
आँख
से
तुम
अगर
उतर
जाते
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Afzal Sultanpuri
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ज़िंदगी
को
अज़ाब
कर
लेना
मौत
से
भी
ख़राब
कर
लेना
Afzal Sultanpuri
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आख़िरत
का
तुम्हें
कहाँँ
डर
है
कह
दिया
कब्र
ने
तिरा
घर
है
Afzal Sultanpuri
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तेरे
ग़म
से
नजात
मिल
जाए
और
तुझको
हयात
मिल
जाए
आज
कल
बदले
बदले
तेवर
हैं
काश
तुम
से
ही
मात
मिल
जाए
साफ़
इनकार
करना
बनता
है
चाहे
नहर-ए-फ़ुरात
मिल
जाए
लौटकर
एक
दिन
तू
आएगा
है
दु'आ
तेरा
साथ
मिल
जाए
बैठकर
बात
कर
रहे
थे
हम
काश
वैसी
ही
रात
मिल
जाए
तू
अगर
मिल
नहीं
सका
हमदम
क्या
मज़ा
कायनात
मिल
जाए
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Afzal Sultanpuri
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