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Afzal Sultanpuri
tere gham se nijaat mil jaa.e
tere gham se nijaat mil jaa.e | तेरे ग़म से नजात मिल जाए
- Afzal Sultanpuri
तेरे
ग़म
से
नजात
मिल
जाए
और
तुझको
हयात
मिल
जाए
आज
कल
बदले
बदले
तेवर
हैं
काश
तुम
से
ही
मात
मिल
जाए
साफ़
इनकार
करना
बनता
है
चाहे
नहर-ए-फ़ुरात
मिल
जाए
लौटकर
एक
दिन
तू
आएगा
है
दु'आ
तेरा
साथ
मिल
जाए
बैठकर
बात
कर
रहे
थे
हम
काश
वैसी
ही
रात
मिल
जाए
तू
अगर
मिल
नहीं
सका
हमदम
क्या
मज़ा
कायनात
मिल
जाए
- Afzal Sultanpuri
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हाए
इज़हार
करके
पछताए
यार
हम
प्यार
करके
पछताए
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बराए-इश्क़
जब
बदनाम
होगा
जहाँ
में
हर
तरफ़
कोहराम
होगा
उसे
मुझ
सेे
जुदा
करके
तो
देखो
तुम्हारा
यार
क्या
अंजाम
होगा
बनेगी
वो
अगर
राधा
हमारी
हमारा
नाम
फिर
घनश्याम
होगा
वो
मुझ
सेे
कह
रही
थी
बाद
शादी
मिरा
मज़हब
सनम
इस्लाम
होगा
चले
हम
छोड़कर
दुनिया
तुम्हारी
क़फ़न
को
ओढ़कर
आराम
होगा
सिकंदर
जीत
कर
हारा
हुआ
था
कि
साहिल
सिंध
में
नाकाम
होगा
किसी
तारीक
कोने
में
छुपा
हूँ
कि
अफ़ज़ल
आज
से
गुमनाम
होगा
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अभी
वो
लौटकर
आया
नहीं
काबे
कि
ज़ानिब
से
मिला
था
गांँव
के
हद
पर
करी
बातें
कवाकिब
से
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दर्द
में
मैं
मर
न
जाऊँ
लौट
आओ
सच
कहूँ
कुछ
कर
न
जाऊँ
लौट
आओ
Afzal Sultanpuri
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ज़िंदगी
ने
यही
सिखाया
है
धूप
में
छाँव
काम
आया
है
आरज़ू
ख़त्म
हो
गई
मेरी
फोन
पर
कौन
हो
बुलाया
है
थी
तमन्ना
गले
लगा
लो
तुम
और
फिर
मौत
ने
लगाया
है
क्या
यही
प्यार
की
हक़ीक़त
है
प्यार
को
यार
किसने
पाया
है
और
भी
दोस्त
हैं
हमारे
पर
तुमको
अपना
सनम
बनाया
है
इस
ग़ज़ल
को
तुम्हारी
हाजत
है
इसने
तो
नूर
तुम
सेे
पाया
है
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Afzal Sultanpuri
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