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Afzal Sultanpuri
abhii talwaar ke sab ghaav rahne de
abhii talwaar ke sab ghaav rahne de | अभी तलवार के सब घाव रहने दे
- Afzal Sultanpuri
अभी
तलवार
के
सब
घाव
रहने
दे
लगा
मरहम
नहीं
अब
घाव
रहने
दे
- Afzal Sultanpuri
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बिछड़े
तो
रख
रखाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
ताज़ा
किसी
को
घाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
बस
देख
कर
ही
उसको
परिंदे
उतर
गए
उसको
तो
आओ
आओ
भी
करना
नहीं
पड़ा
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Azbar Safeer
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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यूँँ
न
क़ातिल
को
जब
यक़ीं
आया
हम
ने
दिल
खोल
कर
दिखाई
चोट
Fani Badayuni
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चोट
खाई
थी
एक
बार
मगर
उम्र
भर
को
बिखर
गए
हैं
हम
Munazzah Noor
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हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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अक्सर
ही
ज़ख़्म
इश्क़
में
पाले
हैं
औरतें
पर
कितने
टूटे
मर्द
सँभाले
हैं
औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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वो
कहाँ
मेरे
पास
है
मालिक
मेरी
दुनिया
उदास
है
मालिक
हर
दु'आ
में
उसे
ही
माँगा
है
तू
मिला
दे
वो
ख़ास
है
मालिक
मैं
तो
जाहिल
मुझे
तमीज़
नहीं
मेरी
तुझ
सेे
ही
आस
है
मालिक
दर
तिरा
छोड़कर
कहाँ
जाएँ
मेरा
तू
ही
मिरास
है
मालिक
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Afzal Sultanpuri
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दर्द
में
मैं
मर
न
जाऊँ
लौट
आओ
सच
कहूँ
कुछ
कर
न
जाऊँ
लौट
आओ
Afzal Sultanpuri
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हमें
पागल
किया
था
चीज़
ने
जो
अरे
बेशक
वही
था
तिल
तुम्हारा
Afzal Sultanpuri
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सारे
ख़्वाब
उसी
के
थे
मेरी
तो
बस
आँखें
थीं
मुझ
में
सुब्ह
उसी
से
थे
पहले
अँधेरी
रातें
थी
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Afzal Sultanpuri
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हमें
मालूम
नहीं
था
ये
मुसीबत
है
हमें
ये
इल्म
नहीं
था
की
रिवायत
है
Afzal Sultanpuri
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