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Afzal Sultanpuri
yahaañ jo shaKHs tha vo ghar gaya hai
yahaañ jo shaKHs tha vo ghar gaya hai | यहाँ जो शख़्स था वो घर गया है
- Afzal Sultanpuri
यहाँ
जो
शख़्स
था
वो
घर
गया
है
ज़मीं
पर
था
अभी
अंदर
गया
है
किया
था
क़ैद
रूहों
ने
उसे
तो
उसे
ढूँढो
नहीं
वो
मर
गया
है
उठाई
जब
नज़र
हम
पर
किसी
ने
बदन
क्या
चीज़
फिर
तो
सर
गया
है
कबीला
ख़त्म
कर
देंगें
किसी
दिन
हमारी
सिम्त
वो
लश्कर
गया
है
मदीना
को
गया
दरवेश
अफ़ज़ल
ज़रा
पश्चिम
ज़रा
उत्तर
गया
है
बड़े
ही
शौक
से
बोली
कि
बच्चे
मुझे
कहना
पड़ा
तुम
पर
गया
है
- Afzal Sultanpuri
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तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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उसी
के
चेहरे
पे
आँखें
हमारी
रह
जाएँ
किसी
को
इतना
भी
क्या
देखना
ज़रूरी
है
Jyoti Azad Khatri
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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न
करो
बहस
हार
जाओगी
हुस्न
इतनी
बड़ी
दलील
नहीं
Jaun Elia
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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उतर
गया
है
चेहरा
तेरे
जाने
से
लॉक
नहीं
खुलता
है
अब
मोबाइल
का
Tanoj Dadhich
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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नदी
आँखें
भँवर
ज़ुल्फ़ें
कहाँ
तैरूँ
कहाँ
डूबूँ
कि
तेरे
शहर
में
सब
की
अदाएँ
एक
जैसी
हैं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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न
क़ाबे
में
रहेंगे
न
काशी
में
रहेंगे
परेशाँ
ही
जिएँगे
उदासी
में
रहेंगे
Afzal Sultanpuri
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मेरी
कैसी
ईद,
मेरी
कैसी
दिवाली
तेरे
बिना
जब
हैं
शा
में
ख़ाली
ख़ाली
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Afzal Sultanpuri
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मक़्सद
सला-ए-आम
है
फिर
एहतियात
क्यूँँ
उन
सेे
हुई
है
बात
तो
फिर
इनसे
बात
क्यूँँ
Afzal Sultanpuri
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ख़ामुशी
से
ग़ज़ल
सुनाते
रहे
हम
मोहब्बत
उसे
जताते
रहे
Afzal Sultanpuri
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छोड़कर
मुझको
गया
इस
में
गया
क्या
आपका
रो
रहा
मैं
चीख़
कर
इस
में
नफ़ा
क्या
आपका
काम
आता
है
हमेशा
से
वही
हम
लोग
के
है
मेरा
ये
है
तेरा
ये
है
ख़ुदा
क्या
आपका
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Afzal Sultanpuri
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