dast-e-dilbar kyuuñ nahin milta | दस्त-ए-दिलदार क्यूँ नहीं मिलता

  - Afzal Sultanpuri
दस्त-ए-दिलदारक्यूँनहींमिलता
मिलकेभीयारक्यूँनहींमिलता
कितनाभीवोक़रीबजाए
लबसेरुख़्सारक्यूँनहींमिलता
शाहज़ादीइधरतोआतीहैं
उनकादीदारक्यूँनहींमिलता
हैयहीचाहचोटखाऊँमैं
राहमेंख़ारक्यूँनहींमिलता
एकउम्मीदसौपरेशानी
प्यारमेंप्यारक्यूँनहींमिलता
उनकीहसरतगलेलगानेकी
वोतलबगारक्यूँनहींमिलता
देखताहैमुझेकिनारेसे
वोनदीपारक्यूँनहींमिलता
दिलजहाँकौड़ियोंकेभावमिले
वैसाबाज़ारक्यूँनहींमिलता
बेचनाहैमुझेसुख़नअपना
येख़रीदारक्यूँनहींमिलता
  - Afzal Sultanpuri
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