दस्त-ए-दिलदारक्यूँनहींमिलता
मिलकेभीयारक्यूँनहींमिलता
कितनाभीवोक़रीबआजाए
लबसेरुख़्सारक्यूँनहींमिलता
शाहज़ादीइधरतोआतीहैं
उनकादीदारक्यूँनहींमिलता
हैयहीचाहचोटखाऊँमैं
राहमेंख़ारक्यूँनहींमिलता
एकउम्मीदसौपरेशानी
प्यारमेंप्यारक्यूँनहींमिलता
उनकीहसरतगलेलगानेकी
वोतलबगारक्यूँनहींमिलता
देखताहैमुझेकिनारेसे
वोनदीपारक्यूँनहींमिलता
दिलजहाँकौड़ियोंकेभावमिले
वैसाबाज़ारक्यूँनहींमिलता
बेचनाहैमुझेसुख़नअपना
येख़रीदारक्यूँनहींमिलता