na dasht dasht ki soorat na ghar hai ghar ki tarah | न दश्त दश्त की सूरत न घर है घर की तरह

  - Afzal Kiratpuri
दश्तदश्तकीसूरतघरहैघरकीतरह
बदलगईहैहरइकशयतिरीनज़रकीतरह
हैलम्हालम्हाइकअंजानरहगुज़रकीतरह
गुज़ररहेहैंशब-ओ-रोज़भीसफ़रकीतरह
वहीमुहीबअँधेरावहीदिलोंपेहिरास
नईसहरभीनहींदोस्तोसहरकीतरह
ढलीहैरातमगरमेरेघरकादरवाज़ा
खुलाहुआहैअभीचश्म-ए-रह-गुज़रकीतरह
शिकस्त-ओ-रेख़्तकेबा-वस्फ़हमखड़ेहैंअभी
फ़सील-ए-शहरकेदेरीनाबाम-ओ-दरकीतरह
हर्फ़आनेदियाआबरू-ए-फ़नपेकभी
हमअंजुमनमेंरहेहर्फ़-ए-मो'तबरकीतरह
तिलिस्म-ए-लाला-ओ-गुलताफ़रेब-ए-दाम'अफ़ज़ल'
मैंहरमक़ामसेगुज़राहूँदीदा-वरकीतरह
  - Afzal Kiratpuri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy