paani shajar pe phool banaa dekhta raha | पानी शजर पे फूल बना देखता रहा

  - Afzaal Naveed
पानीशजरपेफूलबनादेखतारहा
औरदश्तमेंबबूलबनादेखतारहा
अय्यामकेग़ुबारसेनिकलातोदेरतक
मैंरास्तोंकोधूलबनादेखतारहा
तूबाज़ुओंमेंभरकेगुलाबोंकोसोरही
मैंभीख़िज़ाँकाफूलबनादेखतारहा
कोंपलसेएकलबसेफ़रामोशहोकेमैं
किसगुफ़्तुगूमेंतूलबनादेखतारहा
बादा-कशोंकेख़ूँसेछलकताथामय-कदा
ख़मियाज़ा-ए-मलूलबनादेखतारहा
पिछलेखंडरसेअगलेखंडरतकथाइंतिज़ार
मैंआत्माकीभूलबनादेखतारहा
नाम-ओ-नुमूदहफ़्त-जिहतसौंपकरमुझे
सूरजधनकमेंधूलबनादेखतारहा
थासब्ज़ा-ए-कशीदादरख़्तोंकेदरमियाँ
ना-क़ाबिल-ए-क़ुबूलबनादेखतारहा
तज्सीम-ए-नौ-ब-नौकाकरिश्माथाऔरही
मैंअपनासाउसूलबनादेखतारहा
लौह-ओ-क़लमकीख़ैर-सेगालीकेवास्ते
शीराज़ा-ए-नुज़ूलबनादेखतारहा
बनतेहीमिटगयाथाख़बरहीहोसकी
मैंनक़्शकोफ़ुज़ूलबनादेखतारहा
चुटकीसेबढ़केथाहजमफिरभीमैं'नवेद'
आमेज़ेमेंहुलूलबनादेखतारहा
  - Afzaal Naveed
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