ye jabr bhi hai bahut ikhtiyaar karte hue | ये जब्र भी है बहुत इख़्तियार करते हुए

  - Aftab Hussain
येजब्रभीहैबहुतइख़्तियारकरतेहुए
गुज़ररहीहैतिराइंतिज़ारकरतेहुए
कलीखिलीतोउसीख़ुश-सुख़नकीयादआई
सबाभीअबकेचलीसोगवारकरतेहुए
तिरेबदनकेगुलिस्ताँकीयादआतीहै
ख़ुदअपनीज़ातकेसहराकोपारकरतेहुए
येदिलकीराहचमकतीथीआइनेकीतरह
गुज़रगयावोउसेभीग़ुबारकरतेहुए
ख़ुदअपनेहाथकीहैबतसेकाँपजाताहूँ
कभीकभीकिसीदुश्मनपेवारकरतेहुए
  - Aftab Hussain
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