phaile hue hain shahar men saa.e nidhaal se | फैले हुए हैं शहर में साए निढाल से

  - Adil Mansuri
फैलेहुएहैंशहरमेंसाएनिढालसे
जाएँकहाँनिकलकेख़यालोंकेजालसे
मशरिक़सेमेरारास्तामग़रिबकीसम्तथा
उसकासफ़रजुनूबकीजानिबशुमालसे
कैसाभीतल्ख़ज़िक्रहोकैसीभीतुर्शबात
उनकीसमझमेंआएगीगुलकीमिसालसे
चुप-चापबैठेरहतेहैंकुछबोलतेनहीं
बच्चेबिगड़गएहैंबहुतदेख-भालसे
रंगोंकोबहतेदेखिएकमरेकेफ़र्शपर
किरनोंकेवाररोकिएशीशेकीढालसे
आँखोंमेंआँसुओंकाकहींनामतकनहीं
अबजूतेसाफ़कीजिएउनकेरुमालसे
चेहराबुझाबुझासापरेशानज़ुल्फ़ज़ुल्फ़
अल्लाहदुश्मनोंकोबचाएवबालसे
फिरपानियोंमेंनुक़रईसाएउतरगए
फिररातजगमगाउठीचाँदीकेथालसे
  - Adil Mansuri
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