darwaaza band dekh ke mire makaan ka | दरवाज़ा बंद देख के मेरे मकान का

  - Adil Mansuri
दरवाज़ाबंददेखकेमेरेमकानका
झोंकाहवाकाखिड़कीकेपर्देहिलागया
वोजान-ए-नौ-बहारजिधरसेगुज़रगया
पेड़ोंनेफूलपत्तोंसेरस्ताछुपालिया
उसकेक़रीबजानेकाअंजामयेहुआ
मैंअपने-आपसेभीबहुतदूरजापड़ा
अंगड़ाईलेरहीथीगुलिस्ताँमेंजबबहार
हरफूलअपनेरंगकीआतिशमेंजलगया
काँटेसेटूटतेहैंमिरेअंगअंगमें
रगरगमेंचाँदजलताहुआज़हरभरगया
आँखोंनेउसकोदेखानहींइसकेबावजूद
दिलउसकीयादसेकभीग़ाफ़िलनहींरहा
दरवाज़ाखटखटाकेसितारेचलेगए
ख़्वाबोंकीशालओढ़केमैंऊँघतारहा
शबचाँदनीकीआँचमेंतपकरनिखरगई
सूरजकीजलतीआगमेंदिनख़ाकहोगया
सड़केंतमामधूपसेअँगाराहोगईं
अंधीहवाएँचलतीहैंइनपरबरहना-पा
वोआएथोड़ीदेररुकेऔरचलेगए
'आदिल'मैंसरझुकाएहुएचुपखड़ारहा
  - Adil Mansuri
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