sabhi ke dilon men jo ghar kar rahi hain | सभी के दिलों में जो घर कर रही हैं

  - Prashant Kumar
सभीकेदिलोंमेंजोघरकररहीहैं
मिरीज़िंदगीपरगुज़रकररहीहैं
बहकनेलगेबिनलगाएशराबी
तुम्हारीनिगाहेंअसरकररहीहैं
वोचिंगारियोंकोदिखाकरकेतिनका
मिरेझोपड़ेकीख़बरकररहीहैं
परेशानकरतीहैंज़ुल्फ़ेंतुम्हारी
मुझेरातदिनबे-ख़बरकररहीहैं
कईरानियाँकाख़-ए-उमरासेबे-घर
मिरेझोपड़ेमेंबसरकररहीहैं
शकीलाजमीलासबआपसमेंमिलकर
मिरेबाँकपनकीनज़रकररहीहैं
  - Prashant Kumar
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