patthar ke log hain ab patthar ka hai zamaana | पत्थर के लोग हैं अब पत्थर का है ज़माना

  - Prashant Kumar
पत्थरकेलोगहैंअबपत्थरकाहैज़माना
पहचानलोसभीकोऐसेदिललगाना
करताबयानकैसेजबहर्फ़-आश्नाथा
आँखोंसेहीकहाथाचाहतकाहरफ़साना
आहटसेझोपड़ेकेतिनकेचमकउठेथे
रौशनकियाथाऐसेमेराग़रीब-ख़ाना
तेरीतोहरअदामेंअश'आरहीछुपेहैं
अंदाज़चालकाभीलगताहैशायराना
ख़ुदमिलकेआजतुझसेेहरबातहमकरेंगे
जोजीमेंआएअबतोवोकरलेयेज़माना
इकदिनकीबातहोतीतोफिरविचारकरते
तेरीहैरोज़आदतयेरूठनामनाना
वैसेतोअप्सरासबढ़करहीलगरहीहै
चस्मककातेरीलेकिनअंदाज़हैपुराना
आँखोंकीपुतलियाँभीकरतींयहीइशारा
जोआँखमेंहोतेरीकजरावहीलगाना
फस्ल-ए-बहारजैसेज़ुल्फ़ोंमेंखिलरहीहो
ऊपरसेलगरहीहैजन्नतकाभीख़जाना
अंदाज़अपनाअबभीबब्बरसेकमनहींहै
बचपनसेहीरहाहैशे'रोंसेदोस्ताना
मातासेपूछजाकरयेभूखप्यासक्याहै
पापासपूछजाकरकैसेहैघरचलाना
  - Prashant Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy