muddaton se yahaañ thehra bhi nahin hai koii | मुद्दतों से यहाँ ठहरा भी नहीं है कोई

  - Prashant Kumar
मुद्दतोंसेयहाँठहराभीनहींहैकोई
झोपड़ेमेंदियाजलताभीनहींहैकोई
फिरख़ुदाक्यूँँमरेशोख़अदापरतेरी
लोगज़िंदाभीहैंज़िंदाभीनहींहैकोई
सीखेंतोआपसेअंदाज़-ए-बयाँकरनासब
बातपूरीकहीसमझाभीनहींहैकोई
घूमकरदेखलियासारेज़मानेमेंकल
आपकेजैसातोचेहराभीनहींहैकोई
सोचलेंकैसेबतादिलकोलगानेकीअब
देखकरहमकोतोहँसताभीनहींहैकोई
  - Prashant Kumar
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