mire naaz nakhre uthaane lage | मिरे नाज़ नख़रे उठाने लगे

  - Prashant Kumar
मिरेनाज़नख़रेउठानेलगे
वोबाहोंमेंजबसेसुलानेलगे
लड़कपनमेंशाहीसिकंदरथेहम
बड़ेहोगएतोकमानेलगे
पढ़ेभीलिखेभीमगरक्यामिला
येबेरोज़गारीबढ़ानेलगे
मुहब्बतकामौसमहैजानेदेअब
मुझेहुस्नवालेबुलानेलगे
सुपारीभीमेरीउसेदीजिसे
उठानेमेंख़ंजरज़मानेलगे
नयासालहोगातुम्हारेलिए
हमेंरातदिनसबपुरानेलगे
थाख़ंजरनयाहाथभीथानया
तोफिरक्यूँँयेज़ख़्माँपुरानेलगे
  - Prashant Kumar
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