may-khaana-e-hasti ka kya daur KHaraab aaya | मय-ख़ाना-ए-हस्ती का क्या दौर ख़राब आया

  - Prashant Kumar
मय-ख़ाना-ए-हस्तीकाक्यादौरख़राबआया
काग़ज़पेशराबआईहाथोंमेंकबाबआया
दीदारकेवक़्तउनकीयेबातचुभीहमको
सालोंमेंतोआएथेसालोंमेंहिजाबआया
हमकाममहीनोंकासेकेंडमेंकरतेहैं
नज़रेंहीमिलीथींबसइतनेमेंगुलाबआया
मिलनेकेबहानेसेकलहमकोबुलायाथा
फिरबातकीशादीकीघरसेभीजवाबआया
मंज़ूरनहींकरतेफिरमेरीनिशानीक्यूँँ
मक़बूलनहींहूँयाग़ैरोंकाजवाबआया
किरदारतोहैयकतातेराकि'प्रशांत'आ'ला
तूजबभीजहाँआयाबनकरकेनवाबआया
  - Prashant Kumar
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