dekha magar nigaah jhuka kar chale ga.e | देखा मगर निगाह झुका कर चले गए

  - Prashant Kumar
देखामगरनिगाहझुकाकरचलेगए
अपनानज़रनज़रमेंबताकरचलेगए
मैंतोसमझरहाथाकोईअजनबीमगर
वोदिलपेमेरानामदिखाकरचलेगए
रुख़सारदेरहेथेगवाहीख़ताकीकल
मेरीख़ताएँसरपरउठाकरचलेगए
कलतोमिरेबग़ैरनिभालीहरएकरस्म
सिंदूरमेरेनामलगाकरचलेगए
नादानथेअभीभीमोहब्बतमेंहममगर
वोएकहीनज़रमेंसिखाकरचलेगए
ख़ंजरअगरचलातेतोआतेनिगाहमें
ज़हराबलाएरातपिलाकरचलेगए
  - Prashant Kumar
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