jiske ghar bhi ga.e nafrat ko mita kar aa.e | जिसके घर भी गए नफ़रत को मिटा कर आए

  - Prashant Kumar
जिसकेघरभीगएनफ़रतकोमिटाकरआए
हममोहब्बतकाचलनसबकोसिखाकरआए
रोटियाँअपनीकईबारछिनीहैंलेकिन
जबभीघरआएतोमुस्कानसजाकरआए
मक़्तल-ए-जाँमेंपरिंदेगँवाबैठेसबकुछ
बड़ीमुश्किलसेमिरीजानबचाकरआए
क्याकरेंकोईमिलाहीनहींलेनेवाला
हरदफ़ाजानहथेलीपेसजाकरआए
मौतकोभीनहींमालूमकिमैंज़िंदाहूँ
मेरेक़ातिलतोमिरीताकलगाकरआए
जिसनेहरबारचलायामिरेऊपरख़ंजर
हरजगहहमतोउसेजानबताकरआए
दुश्मन-ए-जाँवहीनिकलेगाख़बरथोड़ीथी
हमतोदिलकाउसेमेहमानबनाकरआए
  - Prashant Kumar
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