in mast nigaahon men mizaan hazaaron hain | इन मस्त निगाहों में मीज़ान हज़ारों हैं

  - Prashant Kumar
इनमस्तनिगाहोंमेंमीज़ानहज़ारोंहैं
लोगोंकोपरखनेकेगुणमानहज़ारोंहैं
रो-रोकेमुझेहमदमढूँढोगेकहाँऐसे
इसनामसेदुनियामेंइंसानहज़ारोंहैं
तुमदफ़्नकरोदिलमेंतोबातबनेकोई
धरतीपेख़बरतोहैशमशानहज़ारोंहैं
विश्वासकरूँँऐसेतोकिसकेख़ुदापरमैं
जिसघरमेंजिधरदेखोभगवानहज़ारोंहैं
अबदिलकोलगानेकीतूबातकरमुझपे
पहलेहीमुहब्बतकेफ़रमानहज़ारोंहै
  - Prashant Kumar
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