ham jahaan bhi ga.e logon ko magan kar aa.e | हम जहाँ भी गए लोगों को मगन कर आए

  - Prashant Kumar
हमजहाँभीगएलोगोंकोमगनकरआए
अपनेदुश्मनकीमोहब्बतकोनमनकरआए
मंदिरोंमेंगएतोहमनेनमाज़ेंकींअदा
मस्जिदोंमेंगएतोयारभजनकरआए
क्याकरेंजाननिकलतीहीनहींहैऐसे
ज़हरखानेकाकईबारजतनकरआए
कोईदौलतपेगिराकोईगिराताक़तपर
हमगएऔरमोहब्बतकाचयनकरआए
रोज़ेकाआख़िरीदिनहैकहींतूदिखजाए
इसीचक्करमेंकईबारहवनकरआए
  - Prashant Kumar
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