thehro zaraa si der ko aangan buhaar luun | ठहरो ज़रा सी देर को आँगन बुहार लूँ

  - Prashant Kumar
ठहरोज़रासीदेरकोआँगनबुहारलूँ
ऐसेकिसीकेघरसेचावलउधारलूँ
हीरे-जवाहिरातमुझेकुछचाहिए
मैंतोबसउनकेगालकीगर्द-ओ-ग़ुबारलूँ
देखेंगेवरनालोगहवसकीनिगाहसे
रुकजाफटेपुरानेहैंलत्तेसँवारलूँ
तूमुद्दतोंकेबादतोआयाहैइसतरफ़
थोड़ीसीदेरबैठजाकायानिहारलूँ
अपनेहसीनहुस्नकोमुझसेेछुपाकेरख
ऐसाहोकिरातमेंघूँघटउघारलूँ
  - Prashant Kumar
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