muft men hi loot gaii hasraton kii paalki | मुफ़्त में ही लुट गई हसरतों की पालकी

  - Prashant Kumar
मुफ़्तमेंहीलुटगईहसरतोंकीपालकी
भाड़मेंचलीगईज़िंदगीकमालकी
आजतककिसीकातुमदिलनहींचुरासके
तुमनेपूरीज़िंदगीख़ुदहीपाएमालकी
कलतलकतोठीकथेहाथमेंहीहाथथा
अबहमेंसँभालिएउठरहीहैपालकी
क्याकरेंबतासनमकुछसमझरहा
खेतमेंगुज़रगईउम्रपीर-ज़ालकी
कलबड़ागुमानथारंगरूपपरतुझे
अबचमककहाँगईबोलतेरेगालकी
  - Prashant Kumar
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