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Adarsh Akshar
hui zaraa si raushni to teergii chali gaii
hui zaraa si raushni to teergii chali gaii | हुई ज़रा सी रौशनी तो तीरगी चली गई
- Adarsh Akshar
हुई
ज़रा
सी
रौशनी
तो
तीरगी
चली
गई
वो
मेरे
दिल
को
तोड़
के
ख़ुशी
ख़शी
चली
गई
- Adarsh Akshar
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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महफ़िल
में
बैठे
लोगों
को
भाने
लगी
जब
वो
मेरे
अश'आर
फ़रमाने
लगी
Rachit Sonkar
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तुम्हारे
बाद
इस
आँगन
में
फूल
खिलने
पर
ख़ुशी
हुई
भी
तो
ये
दुख
हुआ
कि
दें
किसको
Mohit Dixit
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समुंदर
में
भी
सहरा
देखना
है
मुझे
महफ़िल
में
तन्हा
देख
लेना
Aqib khan
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हर
ख़ुशी
मुस्कुरा
के
कहती
है
दर्द
बनकर
छुपे
हुए
हो
तुम
आज
आब-ओ-हवा
में
ख़ुश्बू
है
लग
रहा
है
घुले
हुए
हो
तुम
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Ritesh Rajwada
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ख़ुदा
का
शुक्र
अदा
कर
वो
बे-वफ़ा
निकला
ख़ुशी
मना
कि
तिरी
जान
की
बहाली
हुई
Shakeel Jamali
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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है
चाहता
कितना
ये
दिल
तुमको
बताऊँ
कैसे
मैं
सब
सेे
चुरा
कर
के
तुम्हें
अपना
बनाऊँ
कैसे
मैं
Adarsh Akshar
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इतना
करो
उपकार
तुम
छुट्टी
ले
लो
इतवार
तुम
चाहे
जो
भी
हो
जाए
पर
करना
हमीं
से
प्यार
तुम
तुम
से
ही
बस
बनती
मिरी
इकलौते
मेरे
यार
तुम
ख़ुद
को
बड़ा
कहने
लगे
कह
कर
ग़ज़ल
दो
चार
तुम
मुझको
नहीं
पहचाना
क्या
पढ़ते
नहीं
अख़बार
तुम
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Adarsh Akshar
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दुनिया
कहती
थी
मुश्किल
है
लेकिन
दिल
तो
आख़िर
दिल
है
जी
जाँ
इक
करना
पड़ता
है
तब
जाकर
मिलती
मंज़िल
है
मैं
उसके
सुख
में
शामिल
था
वो
मेरे
दुख
में
शामिल
है
मैंने
वो
सब
कुछ
बाँटा
है
जो
कुछ
भी
मुझको
हासिल
है
'अक्षर'
के
बस
आ
जाने
से
खिल
उठती
सारी
महफ़िल
है
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Adarsh Akshar
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जहाँ
पर
थी
रौशनी
उस
जगह
नहीं
तीरगी
कभी
रह
सकी
नहीं
ग़म
ठहर
सका
देर
तक
न
ही
देर
तक
ख़ुशी
रह
सकी
Adarsh Akshar
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तोड़
सारी
बेड़ियाँ
अब
छू
ले
अपना
आसमाँ
अब
देते
देते
थक
चुके
हैं
ज़िंदगी
की
इम्तिहाँ
अब
देखना
गर
कुछ
नया
तो
खोल
मन
की
खिड़कियाँ
अब
प्यार
सच्चा
करने
वाला
यार
मिलता
है
कहाँ
अब
राह
सच
की
चलते
चलते
फट
गईं
हैं
एड़ियाँ
अब
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Adarsh Akshar
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