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Adarsh Akshar
pyaar tha par dooriyaan theen
pyaar tha par dooriyaan theen | प्यार था पर दूरियाँ थीं
- Adarsh Akshar
प्यार
था
पर
दूरियाँ
थीं
बंद
दिल
की
खिड़कियाँ
थीं
आँख
में
ग़ुस्सा
भरा
था
और
मन
में
तल्ख़ियाँ
थीं
तितली
उड़ना
चाहती
थी
पैर
में
पर
बेड़ियाँ
थीं
मन
से
जितनी
दुश्मनी
थी
दिल
से
उतनी
यारियाँ
थीं
इश्क़
के
रस्ते
में
हमको
तो
मिली
तन्हाईयाँ
थीं
- Adarsh Akshar
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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किसी
की
बर्क़-ए-नज़र
से
न
बिजलियों
से
जले
कुछ
इस
तरह
की
हो
ता'मीर
आशियाने
की
Anwar Taban
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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आँसू
हमारे
गिर
गए
उन
की
निगाह
से
इन
मोतियों
की
अब
कोई
क़ीमत
नहीं
रही
Jaleel Manikpuri
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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जहाँ
पर
थी
रौशनी
उस
जगह
नहीं
तीरगी
कभी
रह
सकी
नहीं
ग़म
ठहर
सका
देर
तक
न
ही
देर
तक
ख़ुशी
रह
सकी
Adarsh Akshar
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जल्दी
दुनियादारी
समझो
तरकीबें
तुम
सारी
समझो
जग
को
बेहतर
करना
है
तो
अपनी
ज़िम्मेदारी
समझो
सबके
हिस्से
आ
जाता
है
ग़म
की
कारोबारी
समझो
बात
तुम्हारी
समझी
हमने
अब
तुम
बात
हमारी
समझो
ग़ज़लें
नज़्में
पढ़ते
हो
तो
अपनी
पक्की
यारी
समझो
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Adarsh Akshar
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पहले
बाहरस
फिर
अंदर
टूट
गया
सीने
से
लग
कर
के
ख़ंजर
टूट
गया
यूँँ
बेमतलब
अपनों
से
लड़ते
लड़ते
मेरे
भीतर
एक
सिकंदर
टूट
गया
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Adarsh Akshar
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अब
यही
रास्ता
बचा
है
बस
प्यार
करने
में
फ़ाइदा
है
बस
ग़ज़लों
का
ज़िंदगी
में
यूँँ
आना
एक
सुंदर
सा
हादसा
है
बस
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Adarsh Akshar
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न
दोस्ती
है
किसी
से
मेरी
न
है
मिरी
दुश्मनी
ज़रा
भी
ये
ज़िंदगी
है
गुज़ारी
मैंने
तो
सिर्फ़
ख़ुद
से
ही
बात
करते
Adarsh Akshar
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