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Adarsh Akshar
jisne ki hai muhabbat kabhi
jisne ki hai muhabbat kabhi | जिसने की है मुहब्बत कभी
- Adarsh Akshar
जिसने
की
है
मुहब्बत
कभी
पा
सका
वो
न
फ़ुर्सत
कभी
प्रेम
की
दुनिया
में
आज
तक
जीत
पाई
न
नफ़रत
कभी
बोझ
सब
का
उठाती
है
पर
फिर
भी
थकती
न
औरत
कभी
भूखे
प्यासे
चले
रात
दिन
पर
न
बिगड़ी
तबीअत
कभी
सपने
तेरे
हो
जाएँगे
सच
देखना
कर
के
मेहनत
कभी
- Adarsh Akshar
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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सच
कहें
तो
वो
कहानी
बीच
में
दम
तोड़
देगी
जिस
कहानी
को
सभी
किरदार
छोड़े
जा
रहे
हैं
Anurag Pandey
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मैं
आज
जो
भी
कहूँगा
तुम
सेे
वो
सच
है
जानम
ये
जान
लो
तुम
मिरी
ग़ज़ल
के
हरेक
मिसरे
से
मेरी
चाहत
झलक
रही
है
Amaan Pathan
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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कुछ
तो
मिल
जाए
लब-ए-शीरीं
से
ज़हर
खाने
की
इजाज़त
ही
सही
Arzoo Lakhnavi
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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जिस
रस्ते
से
जाना
तय
है
उस
रस्ते
से
आना
तय
है
यारी
करके
जाना
हमने
यारी
में
जुर्माना
तय
है
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Adarsh Akshar
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इतना
करो
उपकार
तुम
छुट्टी
ले
लो
इतवार
तुम
चाहे
जो
भी
हो
जाए
पर
करना
हमीं
से
प्यार
तुम
तुम
से
ही
बस
बनती
मिरी
इकलौते
मेरे
यार
तुम
ख़ुद
को
बड़ा
कहने
लगे
कह
कर
ग़ज़ल
दो
चार
तुम
मुझको
नहीं
पहचाना
क्या
पढ़ते
नहीं
अख़बार
तुम
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Adarsh Akshar
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हो
चुका
है
मुझे
प्यार
तुम
सेे
मिलना
है
अब
ये
इतवार
तुम
सेे
Adarsh Akshar
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सीने
में
जिनके
है
आतिश
बाक़ी
उन
में
जीने
की
गुंजाइश
बाक़ी
जल्दी
जल्दी
पूरा
करना
'अक्षर'
रखना
मत
कोई
भी
ख़्वाहिश
बाक़ी
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Adarsh Akshar
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दुनिया
कहती
थी
मुश्किल
है
लेकिन
दिल
तो
आख़िर
दिल
है
जी
जाँ
इक
करना
पड़ता
है
तब
जाकर
मिलती
मंज़िल
है
मैं
उसके
सुख
में
शामिल
था
वो
मेरे
दुख
में
शामिल
है
मैंने
वो
सब
कुछ
बाँटा
है
जो
कुछ
भी
मुझको
हासिल
है
'अक्षर'
के
बस
आ
जाने
से
खिल
उठती
सारी
महफ़िल
है
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Adarsh Akshar
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