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Abhishek Dhakad
KHaamushi aur phir ye haalat hai
KHaamushi aur phir ye haalat hai | ख़ामुशी और फिर ये हालत है
- Abhishek Dhakad
ख़ामुशी
और
फिर
ये
हालत
है
सच
कहूँ
तो
तेरी
ज़रूरत
है
आप
को
देख
साफ़
दिखता
है
ये
मुहब्बत
नहीं
इनायत
है
तू
कभी
फ़ोन
तक
नहीं
करता
सबको
मुझ
सेे
यही
शिकायत
है
उस
सेे
तुमको
वफ़ा
की
है
उम्मीद
और
नए
दौर
की
वो
औरत
है
इस
क़दर
तन्हा
हूँ
की
मैं
जैसे
ये
उदासी
ही
मेरी
क़िस्मत
है
- Abhishek Dhakad
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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अपने
दीवाने
को
देकर
दर्द
ओ
ग़म
नाज़
ख़ुद
पे
किस
क़दर
करता
है
वो
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जब
भी
आता
है
दिसम्बर
ग़म
के
टाँके
खुलते
हैं
याद
है
यूँँ
तेरा
जाना
और
कहना
ख़ुश
रहो
Neeraj Neer
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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हुआ
जौन
को
पढ़
के
मालूम
ये
उदासी
का
भी
इक
कलर
होता
है
Viru Panwar
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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तेरे
माथे
पर
जो
दुख
लिक्खे
हैं
इनको
चूम
के
अपना
कर
लूंँगा
मैं
Aarush Sarkaar
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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है
मुहब्बत
तुम्हें
तो
फिर
ये
शिकायत
कैसी
हम
सेफ़र
होते
ही
हैं
दिल
को
दुखाने
वाले
Abhishek Dhakad
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जो
तुम्हारा
पता
करे
कोई
फिर
तो
क्या
ही
वफ़ा
करे
कोई
कैसे
अब
तेरे
हिज्र
से
निकलूँ
हक़
में
मेरे
दु'आ
करे
कोई
जिसकी
ख़ातिर
ये
हाथ
काटे
हैं
उसको
कैसे
जुदा
करे
कोई
अब
तो
दिखता
नहीं
गली
में
वो
बेसबब
क्यूँ
फिरा
करे
कोई
ज़िंदा
रहने
का
छिन
गया
मक़सद
ध्यान
अब
क्यूँ
रखा
करे
कोई
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Abhishek Dhakad
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तुझे
मुझ
सेे
ये
कैसी
है
शिकायत
तेरा
भी
यार
मैं
दूजा
रहा
हूँ
Abhishek Dhakad
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आबरू
ना
लुटे
किसी
की
अब
है
हवस
की
दवा
पता
करना
Abhishek Dhakad
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ख़्वाहिशों
का
गला
दबाना
है
छोड़ती
कब
है
नौकरी
मुझको
Abhishek Dhakad
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