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Abhishek Dhakad
jhooth se mujhko tu rihaa karna
jhooth se mujhko tu rihaa karna | झूट से मुझको तू रिहा करना
- Abhishek Dhakad
झूट
से
मुझको
तू
रिहा
करना
करना
ही
है
तो
बस
वफ़ा
करना
हिज्र
में
तेरे
मिल
सके
राहत
आशिक़ों
के
लिए
दु'आ
करना
एक
मौजूद
है
हुनर
उस
में
छोटी
सी
बात
को
बड़ा
करना
- Abhishek Dhakad
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नख़रे
उन
ख़्वाबों
के
बड़े
होंगे
जिनको
वो
रोज़
देखती
होगी
Harsh saxena
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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उधारी
सर
से
ऊपर
बढ़
चुकी
है
हमारी
जान
जोखिम
में
पड़ी
है
हमीं
अपमान
सहकर
जी
रहे
हैं
अना
की
लाश
पंखे
पर
मिली
है
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Vikas Sahaj
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बा-हुनर
होके
कुछ
न
कर
पाना
रेज़ा-रेज़ा
बिखर
के
ढेह
जाना
मुझको
बेहद
उदास
करता
है
ख़ास
लोगों
का
आम
रह
जाना
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Vishal Bagh
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बे-ख़ुदी
ले
गई
कहाँ
हम
को
देर
से
इंतिज़ार
है
अपना
Meer Taqi Meer
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दर्द
सहने
का
हुनर
तो
पास
सबके
है
मगर
दर्द
कहने
का
हुनर
बस
शायरों
के
पास
है
Divy Kamaldhwaj
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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ख़्वाहिशों
का
गला
दबाना
है
छोड़ती
कब
है
नौकरी
मुझको
Abhishek Dhakad
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आबरू
ना
लुटे
किसी
की
अब
है
हवस
की
दवा
पता
करना
Abhishek Dhakad
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है
मुहब्बत
तुम्हें
तो
फिर
ये
शिकायत
कैसी
हम
सेफ़र
होते
ही
हैं
दिल
को
दुखाने
वाले
Abhishek Dhakad
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तुझे
मुझ
सेे
ये
कैसी
है
शिकायत
तेरा
भी
यार
मैं
दूजा
रहा
हूँ
Abhishek Dhakad
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जबसे
फ़ुर्क़त
तेरी
गुज़ारी
है
ये
तबीअत
बहुत
ही
भारी
है
तेरी
यादों
का
ये
सबब
है,अब
सिर्फ़
सिगरेट
से
ही
यारी
है
किसकी
हालत
पे
हँस
रहे
थे
हम
हाँ
वो
हालत
तो
अब
हमारी
है
एक
लड़की
के
पीछे
जानेजाँ
हमने
सारी
ये
दुनिया
हारी
है
जिसने
नक़्शा
मेरा
बिगाड़ा
है
हाँ
वो
लड़की
बहुत
ही
प्यारी
है
इश्क़
कितनो
को
खा
गया
धाकड़
अब
तो
शायद
तेरी
ही
बारी
है
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Abhishek Dhakad
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