dar-e-khayaal bhi khole siyaah shab bhi karen | दर-ए-ख़याल भी खोलें सियाह शब भी करें

  - Abhishek shukla
दर-ए-ख़यालभीखोलेंसियाहशबभीकरें
फिरउसकेबादतुझेसोचेंयेग़ज़बभीकरें
वोजिसनेशामकेमाथेपेहाथफेराहै
हमउसचराग़-ए-हवा-साज़काअदबभीकरें
सियाहियाँसीबिखरनेलगीहैंसीनेमें
अबउससितारा-ए-शब-ताबकीतलबभीकरें
येइम्तियाज़ज़रूरीहैअबइबादतमें
वहीदु'आजोनज़रकररहीहैलबभीकरें
किजैसेख़्वाबदिखानातसल्लियाँदेना
कुछएककाममोहब्बतमेंबे-सबबभीकरें
मैंजानताहूँकिता'बीरहीनहींमुमकिन
वोमेरेख़्वाबकीतशरीहचाहेजबभीकरें
शिकस्त-ए-ख़्वाबकीमंज़िलभीकबनईहैहमें
वहीजोकरतेचलेआएँहैंसोअबभीकरें
  - Abhishek shukla
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