lamha dar lamha teri raah taka karti hai | लम्हा-दर-लम्हा तिरी राह तका करती है

  - Abbas Qamar
लम्हा-दर-लम्हातिरीराहतकाकरतीहै
एकखिड़कीतिरीआमदकीदु'आकरतीहै
सिलवटेंचीख़तीरहतीहैंमिरेबिस्तरकी
करवटोंमेंहीमिरीरातकटाकरतीहै
वक़्तथमजाताहैअबरातगुज़रतीहीनहीं
जानेदीवार-घड़ीरातमेंक्याकरतीहै
चाँदखिड़कीमेंजोआताथानहींआताअब
तीरगीचारोंतरफ़रक़्सकियाकरतीहै
मेरेकमरेमेंउदासीहैक़यामतकीमगर
एकतस्वीरपुरानीसीहँसाकरतीहै
  - Abbas Qamar
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