kyuuñ Dhoondh rahe ho koi mujhsa mere andar | क्यूँ ढूँढ़ रहे हो कोई मुझ सेा मेरे अंदर

  - Abbas Qamar
क्यूँढूँढ़रहेहोकोईमुझसेामेरेअंदर
कुछभीमिलेगातुम्हेंमेरामेरेअंदर
गहवार-ए-उम्मीदसजाएहुएहररोज़
सोजाताहैमासूमसाबच्चामेरेअंदर
बाहरसतबस्सुमकीक़बाओढ़ेहुएहूँ;
दरअस्लहैंमहशरकईबरपामेरेअंदर
ज़ेबाइशे-माज़ीमेंसियह-मस्तसाइकदिल
देताहैबग़ावतकोबढ़ावामेरेअंदर
सपनोंकेतआक़ुबमेंहैआज़ुरदःहक़ीक़त
होताहैयहीरोज़तमाशामेरेअंदर
मैंकितनाअकेलाहूँतुम्हेंकैसेबताऊँ
तन्हाईभीहोजातीहैतन्हामेरेअंदर
अंदोहकीमौजोंकोइनआँखोंमेंपढ़ोतो
शायदयेसमझपाओहैक्याक्यामेरेअंदर
  - Abbas Qamar
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