ham aise sar-fire duniya ko kab darkaar hote hain | हम ऐसे सर-फिरे दुनिया को कब दरकार होते हैं

  - Abbas Qamar
हमऐसेसर-फिरेदुनियाकोकबदरकारहोतेहैं
अगरहोतेभीहैंबे-इंतिहादुश्वारहोतेहैं
ख़मोशीकहरहीहैअबयेदो-आबारवाँहोगा
हवाचुपहोतोबारिशकेशदीदआसारहोतेहैं
ज़रासीबातहैइसकातमाशाक्याबनाएँहम
इरादेटूटतेहैंहौसलेमिस्मारहोतेहैं
शिकायतज़िंदगीसेक्यूँँकरेंहमख़ुदहीथमजाएँ
जोकम-रफ़्तारहोतेहैंवोकम-रफ़्तारहोतेहैं
गलेमेंज़िंदगीकेरीसमान-ए-वक़्तहैतोक्या
परिंदेक़ैदमेंहोंतोबहुतहुश्यारहोतेहैं
जहाँवालेमुक़य्यदहैंअभीतकअहद-ए-तिफ़्लीमें
यहाँअबभीखिलौनेरौनक़-ए-बाज़ारहोतेहैं
गुलू-ए-ख़ुश्कउनकोभेजताहैदेकेमश्कीज़ा
कुछआँसूतिश्ना-कामोंकेअलम-बरदारहोतेहैं
बदनउनकोकभीबाहरनिकलनेहीनहींदेता
'क़मर-अब्बास'तोबा-क़ाएदातय्यारहोतेहैं
  - Abbas Qamar
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