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Ajeetendra Aazi Tamaam
zindagi se jang chahe zindagi bhar hi chale
zindagi se jang chahe zindagi bhar hi chale | ज़िंदगी से जंग चाहे ज़िंदगी भर ही चले
- Ajeetendra Aazi Tamaam
ज़िंदगी
से
जंग
चाहे
ज़िंदगी
भर
ही
चले
जीते
जी
तो
मेरी
जाँ
अब
हार
मानेंगे
नहीं
मुस्कुरा
कर
ही
सहेंगे
चाहे
जितना
दर्द
हो
मुस्कुराने
से
कदाचित्
रार
ठानेंगे
नहीं
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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जान-लेवा
थीं
ख़्वाहिशें
वर्ना
वस्ल
से
इंतिज़ार
अच्छा
था
Jaun Elia
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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वरना
तो
बेवफ़ाई
किसे
कब
मुआ'फ़
है
तू
मेरी
जान
है
सो
तुझे
सब
मुआ'फ़
है
क्यूँ
पूछती
हो
मैंने
तुम्हें
माफ़
कर
दिया
ख़ामोश
हो
गया
हूँ
मैं
मतलब
मुआ'फ़
है
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Vikram Gaur Vairagi
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जान
लेना
कि
नया
हाथ
बुलाता
है
तुम्हें
गर
कोई
हाथ
छुड़ाए
तो
छुड़ाने
देना
Ameer Imam
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काट
कर
खाने
का
है
अपना
मज़ा
चूस
कर
खाने
में
बात
इक
और
है
आम
का
राजा
है
अल्फांसो
अगर
तो
दशहरी
की
सिफ़ात
इक
और
है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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'आशिक़
हूँ
आशिक़ों
में
सभी
से
ज़ुदा
हूँ
मैं
माशूक़
हूँ
ख़ुदी
का
ख़ुद
अपना
ख़ुदा
हूँ
मैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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शहीदों
ने
लिखी
ये
दास्तान-ए-खूँ
मुबारक
हो
मैं
हिंदुस्तान
हूँ
हर
दिल
में
ज़िंदा
हूँ
मुबारक
हो
Ajeetendra Aazi Tamaam
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अपनी
कि़स्मत
में
ही
जब
इश्क़
नहीं
है
यारो
किसलिए
अश्क-ए-लहू
इश्क़
में
जाया
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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इक
लड़की
जो
मुझ
सेे
लंबी
है
मुझको
वो
अच्छी
लगती
है
उसको
भी
इंट्रेस्ट
है
मुझ
में
लोगों
की
परवाह
करती
है
कितना
शर्माती
है
देखो
नज़रों
से
ओझल
रहती
है
खोयी
खोयी
सी
लगती
है
पागल
सी
दीवानी
सी
है
नाम
नहीं
लेती
मेरा
वो
देखो
तो
कितनी
पगली
है
दूर
से
कहती
है
ओ
मजनू
पास
आने
से
घबराती
है
बात
नहीं
करती
मुझ
सेे
वो
कुछ
भी
पूछूँ
हँस
देती
है
सुलझाती
है
सबके
मैटर
ख़ुद
इक
अनसुलझी
गुत्थी
है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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