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Ajeetendra Aazi Tamaam
watan ki miTTi ka mol kya hai jo bik chuke hain unhen pata kya
watan ki miTTi ka mol kya hai jo bik chuke hain unhen pata kya | वतन की मिट्टी का मोल क्या है जो बिक चुके हैं उन्हें पता क्या
- Ajeetendra Aazi Tamaam
वतन
की
मिट्टी
का
मोल
क्या
है
जो
बिक
चुके
हैं
उन्हें
पता
क्या
वतन
परस्ती
का
उन
सेे
पूछो
है
जिनका
अब
तक
ज़मीर
ज़िंदा
मिली
है
गर
सर
पे
सर
कटे
हैं
न
काम
आई
कोई
सियासत
अतीत
में
देखो
रंग
जाकर
है
ज़ा'फ़रानी
स्वतंत्रता
का
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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मुहब्बत
में
जो
माथा
चूम
कर
वा'दा
किया
उसने
उसे
भी
आम
बातों
का
ही
दर्जा
दे
दिया
उसने
सुधा
के
नाम
पर
विषपान
अब
हम
सेे
नहीं
होगा
सुना
ज्यूँँ
ही
मुहब्बत
से
किनारा
कर
लिया
उसने
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Atul K Rai
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नहीं
मैं
रह
नहीं
सकता
यहीं
मैं
कह
नहीं
सकता
किनारा
है
तभी
हूँ
मैं
नहीं
तो
बह
नहीं
सकता
पुरानी
एक
इमारत
हूँ
कि
क्या
देखा
नहीं
मैंने
किसी
के
छोड़
जाने
से
तो
मैं
यूँँ
ढह
नहीं
सकता
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Praveen Bhardwaj
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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बहुत
मुश्किल
है
कोई
यूँँ
वतन
की
जान
हो
जाए
तुम्हें
फैला
दिया
जाए
तो
हिन्दुस्तान
हो
जाए
Kumar Vishwas
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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मज़हब
नहीं
सिखाता
आपस
में
बैर
रखना
हिन्दी
हैं
हम
वतन
है
हिन्दोस्ताँ
हमारा
Allama Iqbal
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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समय
के
साथ
जीवन
बह
गया
है
कोई
बस
हाथ
मलता
रह
गया
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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दर्द
देता
है
ज़माना
उनको
जो
ज़माने
से
जुदा
होते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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गर
क़लंदर
है
तो
फिर
अवसर
बना
आसमाँ
को
छत
ज़मीं
को
घर
बना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जिसकी
फ़ितरत
ही
बे
वफ़ाई
हो
उस
सेे
उम्मीद-ए-वफ़ा
क्या
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जितने
भी
अपने
थे
सब
के
सब
सयाने
हो
गए
गर्दिश-ए-पैहम
ने
हमको
बेसहारा
कर
दिया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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