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Ajeetendra Aazi Tamaam
tang aa chuke hain apni hi jab zindagi se ham
tang aa chuke hain apni hi jab zindagi se ham | तंग आ चुके हैं अपनी ही जब ज़िंदगी से हम
- Ajeetendra Aazi Tamaam
तंग
आ
चुके
हैं
अपनी
ही
जब
ज़िंदगी
से
हम
शिकवा
करें
ए
जान-ए-जाँ
फिर
क्या
किसी
से
हम
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़िंदगी
ज़िंदा-दिली
का
है
नाम
मुर्दा-दिल
ख़ाक
जिया
करते
हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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तेरे
बग़ैर
भी
तो
ग़नीमत
है
ज़िंदगी
ख़ुद
को
गँवा
के
कौन
तेरी
जुस्तुजू
करे
Ahmad Faraz
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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हुआ
है
वक़्त
का
हम
पर
करम
ये
ज़रा
सा
ज़ख़्म
दिल
का
सिल
गया
है
गँवा
कर
अपनी
कश्ती
सोचते
हैं
ग़नीमत
है
किनारा
मिल
गया
है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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बे
सबब
हाव-हू
सी
रहती
है
दाँव
पर
आबरू
सी
रहती
है
इश्क़
जब
भी
किसी
से
होता
है
इक
अजब
जुस्तजू
सी
रहती
है
लम्हा
दर
लम्हा
दिल
मचलता
है
हर
पहर
आरज़ू
सी
रहती
है
यूँँ
लगे
की
हर
एक
चेहरे
पर
सूरत
इक
हू-ब-हू
सी
रहती
है
मन
भटकता
है
वन
हिरन
बनकर
ख़ुशबू
इक
रू-ब-रू
सी
रहती
है
ख़ुद
से
ही
अब
वो
बात
करता
है
दिल
में
इक
गुफ़्तगू
सी
रहती
है
जलके
सब
ख़ाक
हो
गए
'आज़ी'
फिर
भी
इक
राख
बू
सी
रहती
है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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रोज़
हों
गर
हों
ख़ुशी
के
लम्हे
एक
दिन
होने
से
क्या
होते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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हमको
मज़दूर
कहते
हैं
साहिब
घर
से
निकले
हैं
घर
बचाने
को
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुमको
क्या
लेना
है
और
तुम
कौन
हो
रोऊँ
या
चिल्लाऊँ
मैं
जो
भी
करूँँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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