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Ajeetendra Aazi Tamaam
mujhko hai sab yaad dekho kis tarah
mujhko hai sab yaad dekho kis tarah | मुझको है सब याद देखो किस तरह
- Ajeetendra Aazi Tamaam
मुझको
है
सब
याद
देखो
किस
तरह
मैं
हुआ
बर्बाद
देखो
किस
तरह
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो
किसी
को
याद
कर
के
मुस्कुराया
था
उधर
और
मैं
नादान
ये
समझा
कि
वो
मेरा
हुआ
Iqbal Ashhar
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ख़ुदा
ने
यह
सिफ़त
दुनिया
की
हर
औरत
को
बख़्शी
है
कि
वो
पागल
भी
हो
जाए
तो
बेटे
याद
रहते
हैं
Munawwar Rana
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एक
चेहरा
है
जो
आँखों
में
बसा
रहता
है
इक
तसव्वुर
है
जो
तन्हा
नहीं
होने
देता
Javed Naseemi
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आज
फिर
चाय
बनाते
हुए
वो
याद
आया
आज
फिर
चाय
में
पत्ती
नहीं
डाली
मैं
ने
Taruna Mishra
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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कर
रहा
था
ग़म-ए-जहाँ
का
हिसाब
आज
तुम
याद
बे-हिसाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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तेरी
मजबूरियाँ
दुरुस्त
मगर
तूने
वा'दा
किया
था
याद
तो
कर
Nasir Kazmi
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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दीवानगी
में
देखिये
हमको
ये
क्या
हुआ
सादा-सा
एक
शख़्स
अचानक
ख़ुदा
हुआ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वतन
की
मिट्टी
का
मोल
क्या
है
जो
बिक
चुके
हैं
उन्हें
पता
क्या
वतन
परस्ती
का
उन
सेे
पूछो
है
जिनका
अब
तक
ज़मीर
ज़िंदा
मिली
है
गर
सर
पे
सर
कटे
हैं
न
काम
आई
कोई
सियासत
अतीत
में
देखो
रंग
जाकर
है
ज़ा'फ़रानी
स्वतंत्रता
का
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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चढ़ान
भी
है
ढलान
भी
है
बताओ
है
ये
मुआमला
क्या
चराग़
याँ
जल
के
बुझ
रहे
हैं
के
ज़िंदगी
का
है
मशग़ला
क्या
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम्हारे
शह्र
में
आकर
ठिकाना
ढूँढते
हैं
हम
अपने
शह्र
में
होते
तो
घर
गए
होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
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चला
गया
वो
जिसे
जाना
था
दग़ा
देकर
न
जाने
आँख
से
क्यूँ
रात
भर
बहा
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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