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Ajeetendra Aazi Tamaam
mirii jaañ bebaasi kya dard kya hai
mirii jaañ bebaasi kya dard kya hai | मिरी जाँ बेबसी क्या दर्द क्या है
- Ajeetendra Aazi Tamaam
मिरी
जाँ
बेबसी
क्या
दर्द
क्या
है
ये
उन
सेे
पूछना
जो
बे-ज़बाँ
हैं
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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हम
जान
से
जाएँगे
तभी
बात
बनेगी
तुम
से
तो
कोई
राह
निकाली
नहीं
जाती
Wasi Shah
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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मैं
होश-मंद
हूँ
ख़ुद
भी
सो
मेरी
ग़ज़लों
में
न
रक़्स
करता
है
'आशिक़
न
बाल
खींचता
है
Charagh Sharma
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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ज़मींनें
काँप
उठती
हैं
दहाड़ों
से
नगाड़ों
की
कहीं
इक
मुल्क
जब
इक
मुल्क
पर
परचम
लगाता
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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भेदता
किरणों
से
अपनी
तीरगी
को
सूर्य
उठता
आ
रहा
देखो
उफ़ुक़
पर
जीतनी
है
तुमको
गर
हर
इक
चुनौती
टांग
दो
डर
को
उठा
जज़्बे
की
हुक
पर
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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कहाँ
हिम्मत
पहाड़ों
में
हमारा
रास्ता
रोकें
कलंदर
लोग
हैं
शीशे
से
पत्थर
तोड़
लेते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जो
तुझको
बे-वफ़ा
होना
है
तो
सुन
न
तुझ
सेे
मैं
कहूँगा
बा
वफ़ा
हो
हाँ
जो
रुकना
है
तो
सब
छोड़
नाटक
अगर
जाना
है
तो
फिर
चल
दफ़ा
हो
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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फ़क़त
मालूम
था
तुझ
सेे
लगाकर
मिरा
दिल
टूट
जाएगा
किसी
दिन
नहीं
मालूम
था
पर
दर्द
देकर
तू
इतना
मुस्कुराएगा
किसी
दिन
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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