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Ajeetendra Aazi Tamaam
hamko paagal karne men sab shaamil hain
hamko paagal karne men sab shaamil hain | हमको पागल करने में सब शामिल हैं
- Ajeetendra Aazi Tamaam
हमको
पागल
करने
में
सब
शामिल
हैं
आपकी
ये
मासूम
अदाएँ
क़ातिल
हैं
होंठ
तबस्सुम
आँखें
लब
अंदाज़
सनम
कितने
बे-परवा
कितने
ज़िंदा
दिल
हैं
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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मुझको
ये
नज़र
आया
के
वो
एक
बला
है
कुछ
ख़्वाब
है
कुछ
अस्ल
है
कुछ
तर्ज
-ए-
अदा
है
वो
ग़ैर
की
आग़ोश
में
रहने
लगा
शादाँ
उसको
नहीं
मालूम
के
दिल
मेरा
जला
है
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Navneet krishna
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अपने
दिल
के
ख़ून
से
वो
गुल
खिला
देता
हूँ
मैं
रेगज़ारों
को
गुलिस्ताँ
की
अदा
देता
हूँ
मैं
Qaisar Sidddiqui
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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सुन
ओ
कहानीकार
कोई
ऐसा
रोल
दे
ऐसे
अदा
करूँं
मेरी
इज़्ज़त
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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कभी
चल
कर
रुके
होंगे,
कभी
रुक
कर
चले
होंगे
अदा-ए-ख़ुश-ख़िरामी
में
वो
जाने
कब
ढले
होंगे
सियाही
बे-सबब
आँखों
के
साहिल
पर
नहीं
आती
यक़ीनन
चश्मे-आतिश
में
कई
'आशिक़
जले
होंगे
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Wajid Husain Sahil
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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कहीं
पड़े
न
मोहब्बत
की
मार
होली
में
अदास
प्रेम
करो
दिल
से
प्यार
होली
में
Nazeer Banarasi
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हया
से
सर
झुका
लेना
अदास
मुस्कुरा
देना
हसीनों
को
भी
कितना
सहल
है
बिजली
गिरा
देना
Akbar Allahabadi
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इस
शहर
में
जीने
के
अंदाज़
निराले
हैं
होंटों
पे
लतीफ़े
हैं
आवाज़
में
छाले
हैं
Javed Akhtar
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चले
हैं
हिंद
के
सैनिक
ज़फ़र
को
कटा
लेंगे
झुकाएँगे
न
सर
को
कि
सूखे
टुंड
पर
लगते
नहीं
फल
गिरा
दो
काट
दो
अब
इस
शजर
को
नहीं
उस्ताद
कोई
उनके
जैसा
जो
समझाए
सुख़न
के
हर
भँवर
को
ग़ज़ल
है
मुंतज़िर
इस्लाह
को
इक
मिलो
गर
तुम
तो
ये
कहना
"समर"
को
दो
रोटी
और
बस
कपड़ा
मकान
इक
नहीं
काफ़ी
ओ
दीवाने
गुज़र
को
तुझे
लड़ना
है
प्रतिपल
ज़िंदगी
से
मिला
नज़रें
डरा
दे
अपने
डर
को
जुदा
होकर
वो
देखो
इक
सफ़र
से
चला
है
दिल
मिरा
फिर
इक
सफ़र
को
मोहब्बत
के
मरीजों
पर
मिरी
जाँ
तरस
आए
हर
इक
दीवार
दर
को
दवाएँ
फेल
होती
जा
रही
हैं
सभी
मिलकर
दु'आ
भेजो
असर
को
मैं
अपनी
ज़िंदगी
में
ऐसा
उलझा
लगी
दीमक
मेरे
दस्त-ए-हुनर
को
तुम्हें
गर
सुर्ख़र-रू
होना
है
यारो
जला
दो
फूँक
दो
दिल
के
नगर
को
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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जाने
रहती
है
जुस्तजू
किसकी
ऐसा
लगता
है
शाम
ख़ाली
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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एहसास
नहीं
होता
लुटने
का
सनम
हम
को
जब
आपकी
महफ़िल
से
हम
लौट
के
आते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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हमारी
बेबसी
का
हाल
देखो
हमें
ख़ुद
पर
हँसी
आने
लगी
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मैं
कहता
था
मगर
तूने
न
मानी
पर
अब
तेरा
भी
दिल
भर
ही
गया
ना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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