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Ajeetendra Aazi Tamaam
aankh se ojhal kabhi hota nahin tha jo meri
aankh se ojhal kabhi hota nahin tha jo meri | आँख से ओझल कभी होता नहीं था जो मेरी
- Ajeetendra Aazi Tamaam
आँख
से
ओझल
कभी
होता
नहीं
था
जो
मेरी
अब
उसे
देखे
हुए
कितने
ज़माने
हो
गए
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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इक
नज़र
उस
चेहरे
की
देखी
है
जब
से
यार
मुँह
उतरा
हुआ
है
रौशनी
का
Harsh saxena
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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तुम्हें
देखे
ज़माना
हो
गया
है
नज़र
महके
ज़माना
हो
गया
है
बिछड़के
तुम
सेे
आँखें
बुझ
गई
हैं
ये
दिल
धड़के
ज़माना
हो
गया
है
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Subhan Asad
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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शाम
से
आँख
में
नमी
सी
है
आज
फिर
आप
की
कमी
सी
है
Gulzar
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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सौ
सौ
उमीदें
बँधती
है
इक
इक
निगाह
पर
मुझ
को
न
ऐसे
प्यार
से
देखा
करे
कोई
Allama Iqbal
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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वतन
की
मिट्टी
का
मोल
क्या
है
जो
बिक
चुके
हैं
उन्हें
पता
क्या
वतन
परस्ती
का
उन
सेे
पूछो
है
जिनका
अब
तक
ज़मीर
ज़िंदा
मिली
है
गर
सर
पे
सर
कटे
हैं
न
काम
आई
कोई
सियासत
अतीत
में
देखो
रंग
जाकर
है
ज़ा'फ़रानी
स्वतंत्रता
का
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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छोड़
देते
हैं
लोग
अपनो
को
और
गैरों
से
इश्क़
करते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मिटाकर
किसी
का
जहान
आदमी
बनाता
है
अपना
मकान
आदमी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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चाँद
से
महबूब
में
दिखने
लगा
हमको
ख़ुदा
बात
इतनी
सी
ही
थी
कितने
फ़साने
हो
गए
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जाने
रहती
है
जुस्तजू
किसकी
ऐसा
लगता
है
शाम
ख़ाली
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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