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Aatish Indori
jhooth hai yah ki davaaon se shifa hoti hai
jhooth hai yah ki davaaon se shifa hoti hai | झूट है यह कि दवाओं से शिफ़ा होती है
- Aatish Indori
झूट
है
यह
कि
दवाओं
से
शिफ़ा
होती
है
सिर्फ़
और
सिर्फ़
दु'आओं
से
शिफ़ा
होती
है
शह्र
में
रहते
हुए
ठीक
नहीं
हो
सकते
गाँव-क़स्बों
की
हवाओं
से
शिफ़ा
होती
है
- Aatish Indori
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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अगर
सच
इतना
ज़ालिम
है
तो
हम
से
झूट
ही
बोलो
हमें
आता
है
पतझड़
के
दिनों
गुल-बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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सदाक़त
हो
तो
दिल
सीनों
से
खिंचने
लगते
हैं
वाइज़
हक़ीक़त
ख़ुद
को
मनवा
लेती
है
मानी
नहीं
जाती
Jigar Moradabadi
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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क्या
ग़लत-फ़हमी
में
रह
जाने
का
सदमा
कुछ
नहीं
वो
मुझे
समझा
तो
सकता
था
कि
ऐसा
कुछ
नहीं
इश्क़
से
बच
कर
भी
बंदा
कुछ
नहीं
होता
मगर
ये
भी
सच
है
इश्क़
में
बंदे
का
बचता
कुछ
नहीं
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Tehzeeb Hafi
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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ये
सच
है
कि
पाँवों
ने
बहुत
कष्ट
उठाए
पर
पाँव
किसी
तरह
राहों
पे
तो
आए
Dushyant Kumar
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कुछ
तो
मिल
जाए
लब-ए-शीरीं
से
ज़हर
खाने
की
इजाज़त
ही
सही
Arzoo Lakhnavi
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कैसे
दिल
का
हाल
सही
हो
सकता
है
जब-तब
यूँँ
तुम
साड़ी
में
दिख
जाओगी
Tanha
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बेवफ़ाई
तो
दी
ही
जुदाई
भी
दी
जिस्म
चीरा
तो
चीरा
ख़लाई
भी
दी
दर्द
के
साथ
उसने
दवाई
भी
दी
बे-वफ़ा
क्यूँँ
हुआ
यह
सफ़ाई
भी
दी
सिर्फ़
उसने
जुदाई
दी
है
यूँँ
न
था
भूलने
की
उसे
रहनुमाई
भी
दी
उसने
खोला
नहीं
पर
पता
था
मुझे
उस
वफ़ादार
ने
बेवफ़ाई
भी
दी
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Aatish Indori
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ये
पक्का
है
की
झूटा
प्यार
करते
हैं
मुहब्बत
जो
सरे-बाज़ार
करते
हैं
मुहब्बत
में
अना
पर
कौन
लेता
है
चलो
इक
बार
फिर
इज़हार
करते
हैं
मुहब्बत
में
बिछड़
जाना
ही
अच्छा
है
यही
इक
फ़ैसला
हर-बार
करते
हैं
मुहब्बत
और
दारू
एक
सी
मानो
सभी
पहले
पहल
इंकार
करते
हैं
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Aatish Indori
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मेरा
सागर
ख़यालों
का
किधर
जाता
है
समझो
मेरे
चेहरे
पे
वो
चेहरा
उभर
आता
है
समझो
किसी
का
बे-वफ़ा
होने
का
मंसूबा
नहीं
था
मुहब्बत
का
चढ़ा
दरिया
उतर
जाता
है
समझो
तुम्हारे
कंधे
पर
कुछ
दिन
से
तितली
बैठती
है
मुहब्बत
हो
गई
है
यह
नज़र
आता
है
समझो
परिंदों
को
बताने
की
ज़रूरत
भी
नहीं
है
परिंदा
ख़ुद
बुलंदी
से
उतर
आता
है
समझो
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Aatish Indori
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ख़ुद
चलो
रास्ता
नहीं
चलता
इश्क़
में
पैंतरा
नहीं
चलता
जिसको
जाना
है
वो
तो
जाएगा
इश्क़
का
वास्ता
नहीं
चलता
देखिए
इश्क़
एक
जंगल
है
रास्तों
का
पता
नहीं
चलता
एक
लम्बा
समय
गुज़रने
दो
चार
दिन
में
पता
नहीं
चलता
गाँव
को
अब
महानगर
समझो
हादसों
का
पता
नहीं
चलता
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Aatish Indori
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इल्तिजा
है
बहार
में
रखिए
आप
अपने
दयार
में
रखिए
उम्र
भर
इंतिज़ार
में
रखिए
इश्क़
के
पर
ख़ुमार
में
रखिए
वक़्त
पड़ने
पे
काम
आऊँगा
आप
पहली
क़तार
में
रखिए
आपका
फ़लसफ़ा
समझ
आया
इक
नहीं
सबको
प्यार
में
रखिए
और
फबेगी
यही
हरी
साड़ी
चाँद
तारे
किनार
में
रखिए
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Aatish Indori
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