kahaan tum mulk ke dushman ko dahshat-gard kahte ho | कहाँ तुम मुल्क के दुश्मन को दहशत-गर्द कहते हो

  - Aatish Indori
कहाँतुममुल्ककेदुश्मनकोदहशत-गर्दकहतेहो
उलटकहनाहैइसकारणउसेहमदर्दकहतेहो
तुम्हारेशोरमेंपीड़ाहमारीकौनसुनपाता
ग़ज़बहोरात-दिनचिल्लाकेझूटादर्दकहतेहो
शिकायतचीख़करकरनेसेहासिलकुछनहींहोगा
पताहैआदतनतुमतोहरेकोज़र्दकहतेहो
हमेशासेतिलकबनकरयेमाथेपरविराजेहैं
बहुतपावनहैंयेरज-कणजिसेतुमगर्दकहतेहो
  - Aatish Indori
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