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Aatish Indori
jataate kaise hai yah reet aani chahiye thii
jataate kaise hai yah reet aani chahiye thii | जताते कैसे है यह रीत आनी चाहिए थी
- Aatish Indori
जताते
कैसे
है
यह
रीत
आनी
चाहिए
थी
मुहब्बत
हो
गई
थी
तो
बतानी
चाहिए
थी
ज़रूरी
जब
था
तो
तलवार
उठानी
चाहिए
थी
मुहब्बत
तो
मुहब्बत
है
निभानी
चाहिए
थी
यहाँ
से
लौटने
का
कोई
रस्ता
ही
नहीं
है
तुम्हें
पहले
से
मजबूरी
बतानी
चाहिए
थी
तुम्हारी
तरह
जिसको
बे-वफ़ाई
करना
आता
मुहब्बत
में
तुम्हें
लड़की
सियानी
चाहिए
थी
- Aatish Indori
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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मेरी
जानिब
न
बढ़ना
अब
मोहब्बत
मैं
अब
पहले
से
मुश्किल
रास्ता
हूँ
Liaqat Jafri
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औरों
का
बताया
हुआ
रस्ता
नहीं
चुनते
जो
इश्क़
चुना
करते
हैं,
दुनिया
नहीं
चुनते
Bhaskar Shukla
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कोशिश
भी
कर
उमीद
भी
रख
रास्ता
भी
चुन
फिर
इस
के
ब'अद
थोड़ा
मुक़द्दर
तलाश
कर
Nida Fazli
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मंज़िल
मिली
तो
उसकी
कमी
हमको
खा
गई
सामान
रास्ते
में
जो
खोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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भूल
जोते
हैं
मुसाफ़िर
रस्ता
लोग
कहते
हैं
कहानी
फिर
भी
Ambreen Haseeb Ambar
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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सच
नहीं
है
ये
कि
तलवार
लिखा
करती
है
फ़ैसला
जंग
का
यलग़ार
लिखा
करती
है
प्रेम
संदेश
अगर
लिखना
है
तो
यूँँ
लिक्खो
जिस
तरह
पानी
पे
पतवार
लिखा
करती
है
कोई
नाता
नहीं
है
उसका
वफ़ादारी
से
बस
तख़ल्लुस
वो
वफ़ादार
लिखा
करती
है
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Aatish Indori
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तेरी
आँखों
को
झील
लिखता
था
चिट्ठियाँ
जब
तवील
लिखता
था
डायरी
में
छुपाई
चाहत
यूँँ
नीलिमा
तुझको
नील
लिखता
था
जानता
इश्क़
की
भी
गहराई
वो
जो
आँखों
को
झील
लिखता
था
जिस्म
पाने
की
जल्द-बाज़ी
थी
चिट्ठियाँ
पर
तवील
लिखता
था
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Aatish Indori
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बात
सीधी
कहूँ
ताकि
दिक़्क़त
नहीं
हो
आप
मेरी
ज़रूरत
हो
आदत
नहीं
हो
दूसरा
कोई
मिल
जाएगा
शक
है
इस
पर
ठीक
दिखते
हो
पर
ख़ूब-सूरत
नहीं
हो
पहले
से
कह
रहा
हूँ
कि
पीता
हूँ
दारू
बाद
में
ताकि
कोई
शिकायत
नहीं
हो
यह
दु'आ
पूरी
हो
ही
नहीं
सकती
जानाँ
राह-ए-उल्फ़त
में
कोई
मुसीबत
नहीं
हो
बे-वफ़ा
के
लिए
यह
दु'आ
की
है
आतिश
जो
ज़रूरी
वो
हो
किन्तु
बरकत
नहीं
हो
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Aatish Indori
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डरों
को
जीत
लेना
ज़िंदगी
है
डरों
से
हार
जाना
ख़ुद-कुशी
है
Aatish Indori
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ज़माना
इक
जिसे
अपना
बनाने
में
लगा
है
वही
इक
शख़्स
अब
मुझको
भुलाने
में
लगा
है
लगे
थे
एक
दो
पल
और
मोहब्बत
हो
गई
थी
ज़माना
पर
ज़माने
को
मनाने
में
लगा
है
मोहब्बत
को
भले
कहता
है
नेमत
ये
ज़माना
मोहब्बत
को
जहाँ
से
पर
मिटाने
में
लगा
है
कोई
'आशिक़
नहीं
है
वो
तो
दीवाना
है
'आतिश'
ग़मों
से
घर
क़रीने
से
सजाने
में
लगा
है
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Aatish Indori
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